कोर्ट में पेश नहीं होने पर महेंद्र चावला के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

कोर्ट में पेश नहीं होने पर महेंद्र चावला के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

पानीपत:  सेशन कोर्ट ने नारायण साईं और अन्य आरोपियों से जुड़े मामले में मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता महेंद्र सिंह चावला के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि गवाह आगे भी गवाही दर्ज कराने में देरी करता है तो उसे साक्ष्य पूरा होने तक हिरासत में रखा जाएगा।

सुनवाई के दौरान नारायण साईं, कार्तिक उर्फ राजू, नीरज उर्फ मोनू और तमराज उर्फ ताम्रध्वज उर्फ गोलू को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश किया गया। 

मामले की सुनवाई गवाह महेंद्र चावला के बयान दर्ज करने के लिए निर्धारित थी, लेकिन उनकी ओर से अदालत में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए आवेदन दिया गया।

आवेदन में कहा गया कि चावला वायरल बुखार और कंधे के दर्द से पीड़ित हैं तथा डॉक्टर ने उन्हें पांच दिनों के पूर्ण विश्राम और एकांतवास की सलाह दी है। इसके समर्थन में पानीपत स्थित हंस अस्पताल की पर्ची भी अदालत में प्रस्तुत की गई।

हालांकि, अदालत ने मामले की फाइल का अवलोकन करते हुए पाया कि गवाह द्वारा पहले भी कई बार अलग-अलग कारण बताकर गवाही में देरी की गई है। रिकॉर्ड के अनुसार 11 सितंबर 2025 को आरोप तय किए गए थे और गवाही के लिए 22 सितंबर 2025 की तारीख तय की गई थी। उस दिन गवाह ने अपने भतीजे की शादी का हवाला देते हुए छूट का आवेदन दिया, जिसे अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि आरोपी कार्तिक उर्फ राजू पिछले आठ वर्षों से अधिक समय से हिरासत में है।

23 सितंबर 2025 को चावला अदालत में उपस्थित हुए, लेकिन उन्होंने सिरदर्द का हवाला देकर सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया। इसके बाद 30 सितंबर और 1 अक्टूबर 2025 को उनकी आंशिक मुख्य परीक्षा दर्ज की गई। बाद में उन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 311 के तहत आवेदन दिया, जिसे 18 दिसंबर 2025 को अदालत ने खारिज कर दिया।

इसके बाद 15 जनवरी 2026, 27 जनवरी 2026 और 17 फरवरी 2026 को भी उन्होंने कंधे के दर्द का हवाला देते हुए छूट के लिए आवेदन दिए। 17 फरवरी 2026 को अदालत ने उनका आवेदन खारिज करते हुए उनके खिलाफ 10 हजार रुपये के जमानती वारंट जारी किए थे। 27 फरवरी 2026 को उनकी आंशिक मुख्य गवाही दर्ज की गई और मामले को अगली सुनवाई के लिए स्थगित कर दिया गया।

सुनवाई के दौरान नारायण साईं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता धर्मेंद्र मिश्रा ने भी अदालत में कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि गवाह महेंद्र सिंह चावला बार-बार अलग-अलग बहाने बनाकर गवाही से बचने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे मामले की सुनवाई अनावश्यक रूप से लंबी खिंच रही है।

वर्तमान सुनवाई में भी गवाह के अनुपस्थित रहने पर अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से प्रतीत होता है कि गवाह का उद्देश्य गवाही दर्ज कराने में देरी करना है। इसी आधार पर अदालत ने उनकी ओर से दायर छूट का आवेदन खारिज करते हुए 19 मार्च 2026 के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि गवाह आगे भी साक्ष्य दर्ज कराने में देरी करता है, तो उसे साक्ष्य पूरा होने तक हिरासत में रखा जाएगा।